03. April 2020

सदगुरु जग्गी वासुदेव की जीवनी । Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi

spotyourstorySeptember 26, 2017
1999 में सद्गुरु द्वारा प्रतिष्ठित ध्‍यान लिंग अपनी तरह का पहला लिंग है जिसकी प्रतिष्ठता पूरी हुई है। योग विज्ञान का सार ध्यानलिंग, ऊर्जा का एक शाश्वत और अनूठा आकार है।

सदगुरु जग्गी वासुदेव की जीवनी । Sadhguru Jaggi Vasudev Biography in Hindi

 

युगों पुरानी है मनुष्य की यात्रा की कहानी । यात्रा स्वयं की खोज की । यात्रा अस्तित्व को जानने के लिए । कई बार ऐसी यात्राएं कुछ सालों में पूरी हो जाती है । तो कई बार एक यात्रा कई जन्मों तक चलती है और यह ऐसी ही एक यात्रा की कहानी ।

एक असाधारण मनुष्य की कहानी जिसने कई जीवन लगा दिए सत्य की खोज में एक विद्रोही । जिसे मिली मौत की सजा समाज के नियमों का उल्लंघन करने के लिए और 300 साल बाद वह बना आध्यात्म कि क्रांती से बना विश्व को हिलाने वाला वो इंसान जिसे आज हम सद्गुरू के नाम से जानते हैं । एक आत्मज्ञानी युगदृष्टा और योगी जीनकी सत्य की खोज उन्हें ले गई जीवन और मृत्यु के परे और यह सतगुरु के कई जन्मों की कहानी युगन युगन योगी ।

 

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सद्गुरु जग्गी वासुदेव( Yogi Sadhguru Jaggi vasudev Birthdate ) का जन्‍म 3 सितंबर 1957 को कर्नाटक राज्‍य के मैसूर शहर में हुआ । उनके पिता एक डॉक्टर थे । बालक जग्‍गी को कुदरत से खूब लगाव था । अक्‍सर ऐसा होता था वे कुछ दिनों के लिये जंगल में गायब हो जाते थे, जहां वे पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर हवाओं का आनंद लेते और अनायास ही गहरे ध्‍यान में चले जाते थे । जब वे घर लौटते तो उनकी झोली सांपों से भरी होती थी जिनको पकड़ने में उन्‍हें महारत हासिल है । ११ वर्ष की उम्र में जग्गी वासुदेव ने योग का अभ्यास करना शुरु किया । इनके योग शिक्षक थे श्री राघवेन्द्र राव, जिन्‍हें मल्‍लाडिहल्‍लि स्वामी के नाम से जाना जाता है । मैसूर विश्‍वविद्यालय से उन्‍होंने अंग्रेजी भाषा में स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की ।

२५ वर्ष की उम्र में अनायास ही बड़े विचित्र रूप से, इनको गहन आत्‍म अनुभूति हुई, जिसने इनके जीवन की दिशा को ही बदल दिया। एक दोपहर, जग्गी वासुदेव मैसूर में चामुंडी पहाड़ियों पर चढ़े और एक चट्टान पर बैठ गए। तब उनकी आंखे पूरी खुली हुई थीं। अचानक, उन्‍हें शरीर से परे का अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि वह अपने शरीर में नहीं हैं, बल्कि हर जगह फैल गए हैं, चट्टानों में, पेड़ों में, पृथ्वी में। अगले कुछ दिनों में, उन्‍हें यह अनुभव कई बार हुआ और हर बार यह उन्‍हें परमानंद की स्थिति में छोड़ जाता। इस घटना ने उनकी जीवन शौली को पूरी तरह से बदल दिया। जग्गी वासुदेव ने उन अनुभवों को बाँटने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने का फैसला किया। ईशा फाउंडेशन की स्‍थापना और ईशा योग कार्यक्रमों की शुरुआत इसी उद्देश्‍य को लेकर की गई तकि यह संभावना विश्‍व को अर्पित की जा सके।

जग्गी वासुदेव ( Yogi Sadhguru Jaggi Vasudev ) एक योगी, सद्गुरु और दिव्‍यदर्शी हैं । उनको ‘सद्गुरु’ भी कहा जाता है। वह ईशा फाउंडेशन (  isha foundation नामक लाभरहित मानव सेवी संस्‍थान के संस्थापक हैं । ईशा फाउंडेशन भारत सहित संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड, लेबनान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में योग कार्यक्रम सिखाता है साथ ही साथ कई सामाजिक और सामुदायिक विकास योजनाओं पर भी काम करता है। इसे संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक परिषद ( ECOSOC) में विशेष सलाहकार की पदवी प्राप्‍त है। उन्होने ८ भाषाओं में १०० से अधिक पुस्तकों की रचना की है ।

सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन एक लाभ-रहित मानव सेवा संस्थान है, जो लोगों की शारीरिक, मानसिक और आतंरिक कुशलता के लिए समर्पित है। यह दो लाख पचास हजार से भी अधिक स्वयंसेवियों द्वारा चलाया जाता है। इसका मुख्यालय ईशा योग केंद्र कोयंबटूर में है। ग्रीन हैंड्स परियोजना (Project GreenHands) ईशा फाउंडेशन की पर्यावरण संबंधी प्रस्ताव है। पूरे तमिलनाडु में लगबग १६ करोड़ पेड़ रोपित करना, परियोजना का घोषित लक्ष्य है। अब तक ग्रीन हैंड्स परियोजना के अंतर्गत तमिलनाडु और पुदुच्चेरी में १८०० से अधिक समुदायों में, २० लाख से अधिक लोगों द्वारा ८२ लाख पौधे के रोपण का आयोजन किया है। इस संगठन ने 17 अक्टूबर 2006 को तमिलनाडु के 27 जिलों में एक साथ 8.52 लाख पौधे रोपकर गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था। पर्यावरण सुरक्षा के लिए किए गए इसके महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इसे वर्ष 2008 का इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार दिया गया । वर्ष 2017 में आध्यत्म के आपको पदमविभूषण से भी समानित किया गया । अभी वे रैली फ़ॉर रिवर नदियों के संरक्षण के लिए अभियान चला रहे हैं ।

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ईशा योग केंद्र ( isha yoga center ),  ईशा-फाउन्डेशन के संरक्षण तले स्थापित है। यह वेलिंगिरि पर्वतों की तराई में 150 एकड़ की हरी-भरी भूमि पर स्थित है। घने वनों से घिरा ईशा योग केंद्र नीलगिरि जीवमंडल का एक हिस्सा है, जहाँ भरपूर वन्य जीवन मौजूद है। आंतरिक विकास के लिए बनाया गया यह शक्तिशाली स्थान योग के चार मुख्य मार्ग – ज्ञान, कर्म, क्रिया और भक्ति को लोगों तक पहुंचाने के प्रति समर्पित है। इसके परिसर में ध्यानलिंग योग मंदिर की प्राण प्रतिष्‍ठा की गई है।

1999 में सद्गुरु द्वारा प्रतिष्ठित ध्‍यान लिंग अपनी तरह का पहला लिंग है जिसकी प्रतिष्ठता पूरी हुई है। योग विज्ञान का सार ध्यानलिंग, ऊर्जा का एक शाश्वत और अनूठा आकार है। १३ फीट ९ इंच की ऊँचाई वाला यह ध्यानलिंग ( Dhyanlinga in isha foundation  ) विश्व का सबसे बड़ा पारा-आधारित जीवित लिंग है। यह किसी खास संप्रदाय या मत से संबंध नहीं रखता, ना ही यहाँ पर किसी विधि-विधान, प्रार्थना या पूजा की जरूरत होती है। जो लोग ध्यान के अनुभव से वंचित रहे हैं, वे भी ध्यानलिंग मंदिर में सिर्फ कुछ मिनट तक मौन बैठकर घ्यान की गहरी अवस्था का अनुभव कर सकते हैं। इसके प्रवेश द्वार पर सर्व-धर्म स्तंभ है, जिसमें हिन्दू, इस्लाम, ईसाई, जैन, बौध, सिक्‍ख, ताओ, पारसी, यहूदी और शिन्तो धर्म के प्रतीक अंकित हैं, यह धार्मिक मतभेदों से ऊपर उठकर पूरी मानवता को आमंत्रित करता है।

Sadhguru Website :  ishayoga.org

  • MahaShivRatri 2018 Live – Isha Yoga Center : sadhguru speech । sadhguru videos । sadhguru meditation

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