17. November 2018

Battle of Chamkaur । Guru Gobind Singh ji stories । 40 सीखो ने 10 लाख मुघलो को धुल चटाई

spotyourstoryMarch 11, 2018
"सवा लाख से एक लडाऊ, तभी गोविन्द सिंघ नाम कह्लावु"

Battle of Chamkaur । बैटल ऑफ़ चमकौर । 40 सीखो ने 10 लाख मुघलो को धुल चटाई

आज हम बात कर रहे है “सिखों के 10 वे गुरु गोविन्द सिंघ” ( Guru Gobind Singh ji stories ) के जीवन एक अद्भुत घटना के बारे मै, जी हा आपने सही पढ़ा 40 सिखों ने मिलकर 10 लाख मुघलो को धुल चटाई थी। ये कहानी अद्भुत इसलिए है क्युकी इतने बड़े संख्या मै आये सैनिकोसे लड़ना वाकही कल्पना के परे है। गुरु गोबिन्द सिंह (जन्म: २२ दिसम्बर १६६६, मृत्यु: ७ अक्टूबर १७०८) सिखों के दसवें गुरु थे। उनके पिता गुरू तेग बहादुर की मृत्यु के उपरान्त ११ नवम्बर सन १६७५ को वे गुरू बने। वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन १६९९ में बैसाखी के दिन उन्होने खालसा पन्थ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

हमारे मिलिट्री लीडर, पोलिटिकल लीडर, सोशल लीडर, बिसनेस लीडर इन सबको ये पता होना चयिये क्युकी ये गुरु गोविन्द सिंग एक ऐसे लीडर है, जिन्होंने Un-understandable, Un-Imaginable, Un-Believable विचार प्रक्रिया से इस चमकौर युद्ध को लड़ा था। औरंगजेब ने अपने सेनापति वजीरखान को पीछे लगा दिया था। गुरु गोविन्द सिंघ को पकड़ने केलिए । वजीरखान की 10 लाख सेना गुरु गोविन्द सिंघ के पीछे पीछे घुमती रही।

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औरंगजेब ने दिल्ली से लाहोर तक और लाहोर से कश्मीर तक कब्ज़ा कर लिया था पर उसका एकही सपना था की एक बार गुरु गोविन्द सिंघ को अपने चरणों पर लिटा दू। वजीर खान ने लाखो रुपये खर्च कर दिये थे, तभी बैटल ऑफ़ चमकौर हुआ । एक बड़े किले के अन्दर ये 40 सिख और वो निचे 10 लाख सैनिक उनको घेरे हुए थे।

“सवा लाख से एक लडाऊ, तभी गोविन्द सिंघ नाम कह्लावु”

आप जरा सोचो अगर आपको एकसाथ 50 लोगो ने घेर लिया तो क्या करोगे, इतने मै ही टेंशन मै आ जाओगे और यहाँ पे सौ नहीं, हजार नहीं बल्कि पुरे 10 लाख लोगो ने घेर लिया था। फिर भी ये जीतने की बात कर रहे थे।

एक बात याद रखो – When you get set Back. Do not sit back. only step back- Bounce back

खालसा पथ कहता है की मरते दम तक हार नहीं माननी और दूसरी तरफ वो मुग़ल ये 40 की सेना को कमजोर मान बैठे । तभी गुरु गोविन्द सिंघ ने अपने 40 साथिये से कहा –

चिड़िया दे नाल बाज लडावा,
गिधाडा नु मै शेर बनावा,
सवा लख नाल एक लडावा,
ता गोविन्द सिह नाम कहावा।

गुरु गोविन्द सिंघ की बात सब साथियों ने मान ली और लड़ने के लिए तयार हो गये। साथियो ने कहा आप अपने 2 बेटो को लेकर गुप्त दरवाजे से निकल जाइए पर उन्होंने कहा नहीं ये सारी मेरी संताने है। पाच-पाच करके , आठ-आठ करके भेजते थे बाहर सैनिकोसे लड़ने और ऐसा करके सवा लाख वजीरक के सैनिकोको मार गिराया। गुरु गोविन्द सिह उनके मुह पे तमाचा मार के वहा से निकल गये। इसे कहते है conceieve, Believe और Achieve – उन्होंने ये सोचा की जीतेंगे कैसे, ये नहीं की भागेंगे कैसे ? उन्होंने 10 लाख लोगो को हरा सकते है ये सोचाही (conceieve) कैसे यही हमारे समज के परे है पर उन्होंने सिर्फ सोचा ही नहीं बल्कि उसको सफल भी कर दिखाया तो कोई अब इसे उनका ये पागलपन था ये भी कोई कह नहीं सकता। ऐसे गुरुदेव गोविद सिंघ को और उनके जस्बे को नमन करना चाहिये।

आपकी जिंदगी का ये प्रॉब्लम नहीं है के आप कुछ बड़ा काम नहीं कर पा रहे, प्रॉब्लम आपके जिंदगी मै ये है की .. बड़ा आपने कभी सोचाही नहीं…. सिर्फ 40 लाख लोग लाखो लोगो को मार देंगे ये पृथ्वी की इतिहास मै कभी हुआ नहीं ये गुरु गोविन्द सिंघ ने कर दिखाया।

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