03. April 2020

Chotu Sharma - एक समय पे करते थे चपरासी की नौकरी, आज 10 करोड़ का टर्नओवर है कंपनी का

spotyourstoryAugust 14, 2017
कभी एक-एक पैसे को मोहताज छोटू ने अपनी कंपनी में 150 लोगों को नौकरी दी है। आज वह गरीब बच्चों की मदद करने के अलावा समाजसेवा में भी आगे हैं।

Chotu sharma biography in Hindi

सोचिए किसी के लिए भी कितने गर्व और आत्मसंतुष्टि की बात होती होगी कि जिस जगह पर वो एक चपरासी की नौकरी करता था, आज उसी जगह वो लोगों को पढ़ाता है। एक तिनके से शुरू करके पूरा का पूरा सपने का नगर बना लेना, किसी कपोलकल्पित प्रेरक प्रसंग जैसी बात लगती है। लेकिन ये सारी की सारी प्रेरक कहानियां असल जिंदगी की ही कहानियां होती हैं। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है, मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया है चंडीगढ़ बेस्ड CS group के फाउंडर एवं CEO Chotu Sharma ने।

चपरासी की नौकरी से कॅरिअर शुरू करने वाले जिला कांगड़ा के एक छोटे से गांव के छोटू शर्मा की कंपनी का सालाना टर्न ओवर 10 करोड़ है। चंडीगढ़ के छोटू शर्मा का संघर्ष बहुतों को प्रेरणा देता है। आगे बढ़ने की ललक में छोटू ने दिन भर दफ्तर में चपरासी गिरी की और रातों को भूखे पेट जाग कर पढ़ाई की। आज यही छोटू शर्मा चंडीगढ़ में दो सॉफ्टवेयर कंपनियों का मालिक है। कभी एक-एक पैसे को मोहताज छोटू ने अपनी कंपनी में 150 लोगों को नौकरी दी है। आज वह गरीब बच्चों की मदद करने के अलावा समाजसेवा में भी आगे हैं।
1998 में ढलियारा कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद छोटू के पास कंप्यूटर कोर्स करने के लिए 5000 रुपए भी नहीं थे। कहीं भी काम करने को कंप्यूटर कोर्स जरूरी था। छोटू शर्मा चंडीगढ़ पहुंच गए। फीस भरने को पैसे नहीं थे लेकिन उनको खाली हाथ अपने घर लौटना नहीं था। वो जानते थे उनका परिवार भी इसमें कोई मदद नहीं कर सकेगा। क्योंकि उनके माता पिता की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। काफी प्रयासों के बाद एक कंप्यूटर सेंटर में चपरासी की नौकरी मिली।

यहीं से कंप्यूटर कोर्स किया और माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सॉफ्टवेयर डेवलपर बन गए। छोटू शर्मा के मुताबिक, मुझे इस मुकाम पर पहुंचने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। पैसे बचाने के लिए एक समय का खाना तक छोड़ दिया। शाम के समय बच्चों को उनके घर जाकर ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। चंडीगढ़ में साइकिल पर निकलता था। अपना कंप्यूटर तक नहीं था। दो साल तक बचत करने के बाद अपनी बाइक और कंप्यूटर खरीदा।’

Sandeep Maheshwari – कॉलेज ड्रॉपआउट होकर मल्टी मिलियन डॉलर कंपनी खड़ी कर दी – Images Bazaar

साल बीता और एक साथ दो अच्छे काम हुए। एक तरफ छोटू ने माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइट सॉफ्टवेयर डेवलपर का कोर्स पूरा किया, दूसरी तरफ उसे एपटेक कंप्यूटर सेंटर में ही बतौर फैकल्टी टीचर छात्रों को पढ़ाने का प्रस्ताव मिला। छोटू ने झट से प्रस्ताव स्वीकार किया। शाम के समय छोटू फैकल्टी के तौर पर एपटेक में क्लास लेता और दिन में कई छात्रों के घर जाकर क्लास लेता। इसी दौरान उसने अपनी कमाई से पहली साइकिल खरीदी। 2000 में टीचिंग के बल पर छोटू अच्छी कमाई करने लगा था। लेकिन ये छोटू का लक्ष्य नहीं था।

छोटू के अधिकतर छात्रों को 500 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों में अच्छे खासे पैकेज पर नौकरी मिलती है। उनके छात्रों को माइक्रोसॉफ्ट, एक्सेंचर, टीसीएस और इन्फोसेस जैसी कंपनियों में नौकरी मिली है।

छोटू ने अपने बचत के पैसों से एक बाइक और एक कंप्यूटर खरीदा और दो कमरों के किराए के फ्लैट में अपना कंप्यूटर इंस्टीट्यूट खोल लिया। छह ही महीनों में उसके इंस्टीट्यूट में 80 से ज्यादा स्टूडेंट आने लगे। कुछ समय बाद उसने और कंप्यूटर खरीद लिए। छोटू का संघर्ष और मेहनत रंग लाने लगी और कम ही समय में डॉट नेट की टीचिंग में छोटू का नाम चंडीगढ़ में छा गया। छोटू के अधिकतर छात्रों को 500 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों में अच्छे खासे पैकेज पर नौकरी मिलती है।

उनके छात्रों को माइक्रोसॉफ्ट, एक्सेंचर, टीसीएस और इन्फोसेस जैसी कंपनियों में नौकरी मिली। चंडीगढ़ में छोटू शर्मा को ‘गुरु ऑफ माइक्रोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी’ कहकर बुलाया जाता है।

2007 में छोटू चंडीगढ़ में कई स्थानों पर सीएस इन्फोटेक के नाम से इंस्टीट्यूट खोल लिए। चंडीगढ़ में सीएस इन्फोटेक में 1000 से ज्यादा स्टूडेंट कंप्यूटर शिक्षा ले रहे हैं। 2009 में छोटू ने मोहाली में जमीन खरीद कर अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी खोली। वर्तमान में छोटू शर्मा एडवांस सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लैंग्वेज की एक हजार युवाओं को शिक्षा दे रहे हैं। उनकी फर्म देश-विदेश की बड़ी कंपनियों को सॉफ्टवेयर बनाकर देती है।

वह युवाओं के रोल मॉडल बन गए हैं। आज सीएस सॉफ्ट सॉल्यूशन में 125 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। ये कंपनी बड़ी बड़ी कंपनियों को सॉफ्टवेयर सेवाएं मुहैया कराती है। उन्हें लुधियाना में एलएमए ट्राइडेंट फॉर यंग इनोवेशन आंत्रप्रेन्योर अवार्ड से नवाजा गया है। छोटू शर्मा के संघर्ष और मेहनत के चलते 2007 में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें हिमाचल गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया था।

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