20. October 2018

नहीं रहे अटल बिहारी वाजपेयी । Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

spotyourstoryDecember 25, 2017
अटलजी के कुछ मशहूर कविता के कुछ बोल "बाधाये अति है आये घिरे प्रलय की घोर घटाए पायो के निचे अंगारे सिरपर बरसे यदि ज्वालाये निज हाथो मैं हस्ते हस्ते आग लगाकर चलना होगा कदम मिलाकर चलना होगा"

अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी । Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

ImageSource:www.ndtv.com

अटल संघर्ष…. अटल संकल्प…. अटल मेहनत…. अटल हिम्मत…. अटल सियासत…. अटल शक्सियत… इन सबको मिलाके जो चरित्र तयार होता है भारत के राजनीती मै उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी कहते है । जितनी खुबसूरत उनकी कविता है उतना ही खुबसूरत उनका चरित्र है ।

Atal Bihari Vajpayee Childhood  and Life :

अटलजी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 ( Atal Bihari Vajpayee birthdate 25 December 1924  and Age 93  years ) को ग्वालियर मै हुआ था । उनके पिता कृष्णा बिहारी वाजपेयी एक अध्यापक होने के साथ साथ एक मशहूर कवि भी थे । अटल जी को कविता मै रूचि बचपन से ही हो गयी थी । उन्होंने ग्वालियर के लक्ष्मीबाई कॉलेज से हिंदी, संस्कृत, इंग्लिश मै डिस्टिंक्शन पाके अपना बीए कंप्लीट किया और उसके बाद पोलिटिकल सायन्स मै फर्स्ट डिग्री के साथ अपना MA पूरा किया।

अटलजी ने अजीवन अविवाहित रहने का सोच लिया था । वो 1939 मै 15 साल के कम आयु मै RSS के स्वयंसेवक बने और 1944 मै अटलजी ने आर्य समाज के यूथ विंग के जनरल सेक्रेटरी का पद संभाला । फिर उन्हें विस्तारक के रूप मै उत्तरप्रदेश भेज दिया गया । जहा वो राष्ट्र धर्मा, पंचजन्य,स्वदेस, वीर अर्जुन जैसे अख़बार और पत्रिकाओ के संपादक रहे और 1951 आते तक वो नई बनी हुई भारतीय जनसंघ पार्टी से जुड़ गये । 1957 मै उन्होंने बलरामपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और उसको जित गये । दिनदयाल उपाध्याय की मौत के बाद अटलजी जनसंघ का सबसे मशहूर चेहरा बन गये थे ।

और कुछ प्रेरणादायी कहानी :

Atal Bihari Vajpayee  Politics Career : 

फिर सत्तर की दशक मै शुरू हुआ जयप्रकाश नारायण का संपूर्ण क्रांति आंदोलन । वाजपेयी जीने भी जयप्रकाश का इसमें साथ दिया इसलिए एमरजेंसी के दौर मै वाजपेयीजी को जेल मै भी जाना पड़ा था । सारी अपोजिशन पार्टीज और जनसंघ ने मिलके अलायंस बनाया जिसका नाम पड़ा “जनता पार्टी” । जो 1977 मै अपनी सरकार लाई और वाजपेयीजी इस सरकार मै बने Minister of External Affairs । अटलजी वो पहले भारतीय थे जिसने united nation general assembly मै जाके अपना पूरा भाषण हिंदी मै दिया था ।

लेकिन1979 मै जनता पार्टी के आपसी मतभेदों की वजह से उस समय रहे प्रधानमंत्री मुरार देसाई ने रिज़ाइन कर दिया । इसके बाद वाजपेयीजी ने 1980 मै अपने पुराने दोस्त और साथी L.k.अडवाणी और भैरवसिंह शेखावत के साथ मिलके “भारतीय जनता पार्टी” का निर्माण किया । वो बीजेपी के पहले president बने । लेकिन 1984 के इलेक्शन मै बीजेपी ने सिर्फ 2 सिट जीते । फिर बीजेपी रामजन्म भूमि मंदिर मोवमेंट की आवाज बनी और 1996 के इलेक्शन मै बीजेपी ने बहुत अच्छा परफॉरमेंस दिया और अलायंस के साथ अपनी सरकार बनायीं और इस तरह अटलजी भारत के दसवे प्रधानमंत्री बने । लेकिन ये सरकार सिर्फ 13 दिन के लियें चली क्यूंकि बीजेपी का ये अलायंस टूट गया था । लेकिन अटलजी हार मानने वालो मै से नहीं थे । 1998 के जनरल इलेक्शन मै बीजेपी ने अलायंस के साथ जिसका नाम NDA पड़ा दोबारा सरकार बनाई ।

अपनी इस सरकार मै वाजपेयी जीने पोखरण मै पांच नुक्लियर टेस्ट करवाए और बता दिया पूरी दुनिया को भारत के शक्ति के बारे मै इस दौरान वाजपेयी जीने पाकिस्तान के साथ मैत्री संबध बनाये और दिल्ली लाहोर बस सेवा शुरू की । लेकिन ये सरकार भी सिर्फ 13 महीने ही चली क्यूंकि AIADMK की सुप्रीमो जय ललिता ने अपना समर्थन ख़त्म कर दिया था । फिर अटलजी ने 1999 के जनरल इलेक्शन मै 303 सीटो के साथ NDA के अलायंस मै सरकार बनाई और इस तरह वो तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 2004 तक इस पद को संभाला उन्होंने उनके कार्यकाल मै बहुत बड़ेबड़े कार्य किये । जैसे सो साल पुराने कावेरी जलविवाद को सुल्जाया । राष्ट्रीय जलमार्ग और हवाईअड्डे का विकास किया । नए टेलिकॉम नीतियों तथा कोंकण रेलवे की शुरुवात की । उन्होंने सरकारी खर्च पर रोझाफ्तार करना शुरू कर दिया था । अटल जीने 2005 मै पोलिटिक्स से रिटायर्मेंट लिया था । 2009 मै उनकी तबियत बहुत खराब हो गई थी हेल्थ स्ट्रोक की वजह से उनके बोलने की क्षमता कम हो गयी वो अब बहुत कम ही अपने घर से बाहर निकलते है ।

Atal Bihari Vajpayee  Bharat Ratna Awards & Recognition : 

अटलजी को 2015 मै भारत के सबसे पुरस्कार “भारतरत्न पुरस्कार” से सन्मानित किया गया । ये वो इन्सान हे जिसने अपने आपको पोलिटिक्स मै रखने के बाद भी अपने दामन को हमेशा साफ रखा । भारतीय लोकतंत्र की बदलती सूरत और सीरत के गवाह रहे । वो अटलजी जो एक मजबूत राजनेता है । वो अटलजी जिनके ह्रदय मै संवेदनशील कवी बसता है । देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आज़ाद हिंदुस्तान के राजनितिक आसमान पर चमकता वो सितारा है जिन्होंने देश के हर दौर को रोशन किया है । एक दौर था जब अटल बिहारी वाजपेयी बोला करते थे तो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु मुग्ध होकर सुना करते थे ।

अटलजी के कुछ मशहूर कविता के कुछ बोल “बाधाये अति है आये घिरे प्रलय की घोर घटाए पायो के निचे अंगारे सिरपर बरसे यदि ज्वालाये निज हाथो मैं हस्ते हस्ते आग लगाकर चलना होगा कदम मिलाकर चलना होगा”

Atal Bihari Vajpayee Birth date : 25 December 1924

Atal Bihari Vajpayee Death16 Aug 2018

Atal Bihari Vajpayee Poem : 

“क़दम मिलाकर चलना होगा।”

बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
हास्य-रूदन में, तूफानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
कुछ कांटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

“गीत नही गाता हूँ।”

बेनकाब चेहरे हैं,
दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ।
गीत नही गाता हूँ।

लगी कुछ ऐसी नज़र,
बिखरा शीशे सा शहर,
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ।
गीत नहीं गाता हूँ ।

पीठ मे छुरी सा चाँद,
राहु गया रेखा फाँद,
मुक्ति के क्षणों में बार-बार बँध जाता हूँ।
गीत नहीं गाता हूँ।

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।
सत्य का संघर्ष सत्ता से,
न्याय लड़ता निरंकुशता से,
अंधेरे ने दी चुनौती है,
किरण अंतिम अस्त होती है।

दीप निष्ठा का‍ लिए निष्कम्प,
वज्र टूटे या उठे भूकंप,
यह बराबर का नहीं है युद्ध,
हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध
हर तरह के शस्त्र से है सज्ज,
और पशुबल हो उठा निर्लज्ज।

किंतु फिर भी जूझने का प्रण,
पुन: अंगद ने बढ़ाया चरण,
प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार,
समर्पण की मांग अस्वीकार।

दांव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते।
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

और कुछ प्रेरणादायी कहानी :

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