डॉ. अब्दुल कलाम - सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते है , सपने तो वो होते है जो आपको सोने नहीं देते ।

spotyourstoryDecember 10, 2017
अब्दुल कलाम जी का कहना है की जीवन मै कठिनाई हमे बर्बाद करने नहीं आती है बल्कि यह हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने मै हमारी मदत करती है । कठिनाई को यह जान लेने दो आप उससे भी ज्यादा कठिन हो ।

सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते है , सपने तो वो होते है जो आपको सोने नहीं देते । – डॉ. अब्दुल कलाम

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ऐसा कहना है भारतरत्न डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का । जिन्होंने अंतरिक्ष और रक्षा विभाग मै भारत को इतना बड़ा योगदान दिया है जिसे हम शब्दों मै बया नहीं कर सकते । जिन्हें हम “मिसाईल मैन” और “जनता के राष्ट्रपति” की नाम से भी जानते है । अब्दुल कलाम 2002-2007 तक भारत के 11वे राष्ट्रपती बने रहे । जिन्हें ये पद टेक्नोलॉजी और साइंस मै उनके विशेष योगदान की वजह से मिला नाकि हमारी देश कि गंदी राजनीती की वजह से । लेकिन अब्दुल जी को यह कामयाबी इतनी आसानी से नहीं प्राप्त हुई थी इस कामयाबी के पीछे एक बहुत बड़ा संघर्ष छुपा हुआ है ।

अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम मै एक मुस्लिम परिवार मै हुआ था । रामेश्वरम जो की पहले मद्रास मै था लेकिन अब वो तमिलनाडु राज्य मै है । उनके पिता जैनुलब्दीन कलाम एक नाविक थे । जो रामेश्वरम आये हिन्दू तीर्थ यात्री को एक छोड़ से दुसरे छोड़ तक ले जाते थे । अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा । वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए ।

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शुरू से ही उनकी परिवार की आर्थिक परिस्तिती ठीक नहीं थी । कैसे भी करके दो वक्त का खाना मिल जाये वही ज्यादा हो जाता था । आर्थिक परिस्थिति अच्छी न होने की वजह से अब्दुल कलाम जी को छोटी उम्र मै ही काम करना पड़ा । वह अपने घर वालो को आर्थिक मदत के लिए स्कुल से आने के बाद newspaper और magazines बेचने का काम करते थे । इतने परिश्रम के बाद भी वो पढाई मै पूरा ध्यान लगाते थे । उनके अन्दर हमेशा कुछ नया सीखने की भूक रहती थी । उन्होंने अपनी पढाई नजदीकी स्कुल से पूरी की । उनके शिक्षक इयादुराई सोलोमन ने उनसे कहा था कि जीवन मे सफलता तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, आस्था, अपेक्षा इन तीन शक्तियो को भली भाँति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए।

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और उसके बाद तिरुचिरापल्ली के सेंट. जोसफ के कॉलेज मै एडमिशन लिया और वहासे ही भौतिक विज्ञान मै ग्रेजुएशन किया । उनके पढ़ने और लिखने के शौक की वजह से उन्होंने पढाई बंद नहीं की और आर्थिक परिस्थिति अच्छी न होने के बावजूद भी उनकी लगन और मेहनत को देखते हुये उनके घर वालो ने पूरा support किया और आगे की पढाई पूरी की । आगे की पढाई के लिए वो 1950 मै मद्रास आये । वहासे मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की । इंजीनियरिंग की पढाई पूरी करने के बाद रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानि DRDO मै वैज्ञानिक के तौर पर चुने गये । वहा पर अब्दुल कलाम जीने अपने करियर की शुरुवात भारतीय वायुसेना के लिए एक छोटेसे हेलिकॉप्टर की डिजाईन बनाकर किया ।

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लेकिन DRDO मै काम करकर उन्हें संतुष्टि नहीं मिल रही थी । DRDO मै एक सिमित काम था जो रोजरोज वही दोहराना था और अब्दुल कलाम जी को एक सिमित काम तक बधे नहीं रहना चाहते थे । कुछ साल वहा काम करने के बाद ट्रान्सफर (Indian Space Research Organisation)ISRO मै हुआ । यहाँ पे वो satellite लॉन्च के परीयोजना पर डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किये थे । उस परियोजना को उन्होंने बखुब ही सफलतापूर्वक पूरा किया और तभी उनको यह एहसास हुआ की शायद मै इसी काम के लिए बना हु । उसके बाद से उन्होंने कभीभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक शक्तिशाली मिसाइल भारत को दी । और दुनिया को दिखा दिया की हम भारतीय भी किसी से कम नहीं ।

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एक अदभुत वैज्ञानिक की तौर पर उनकी उपलब्धियों को देखते हुये 2002 मै उन्हें “राष्टपति” पद का उमेदवार बनाया गया और 2007 तक उन्होंने बखुब ही अपने कार्यो को निभाया । उनकी उम्र काफी ढल चुकी थी । इस उम्र मै आकर हर व्यक्ति आराम करने की सोचता है लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया । वो बहुत सारी जगह पर प्रोफेसर की तौर पर कार्यरत रहे और अपना पूरा समय नवयुवको के मार्गदर्शन मै लगा दिया । मानवता की भलाई और मनुष्य का जीवन अधिक सफल बनाने के लिए अब्दुल कलाम जीने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया । 27 जुलाई 2015 को अध्यापन कार्य के दौरान ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वो हमें छोड़ के चले गये ।

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भारत सरकार द्वारा उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण का सम्मान प्रदान किया गया जो उनके द्वारा इसरो और डी आर डी ओ में कार्यों के दौरान वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिये तथा भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में कार्य हेतु प्रदान किया गया था । 1997 में कलाम साहब को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया जो उनके वैज्ञानिक अनुसंधानों और भारत में तकनीकी के विकास में अभूतपूर्व योगदान हेतु दिया गया था ।

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अब्दुल कलाम जी का कहना है की जीवन मै कठिनाई हमे बर्बाद करने नहीं आती है बल्कि यह हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने मै हमारी मदत करती है । कठिनाई को यह जान लेने दो आप उससे भी ज्यादा कठिन हो ।
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